Daṇḍa-svarūpa-nirūpaṇa
The Nature, Forms, and Function of Daṇḍa
अथ दृष्टवा नियुक्तानि स्वानुरूपेषु कर्मसु । सर्वास्ताननुवर्तेत स्वरांस्तन्त्रीरिवायता
फिर जो सेवक-जन अपनी-अपनी योग्यता के अनुसार कर्मों में नियुक्त दिखें, राजा उन सबके साथ वैसा ही अनुकूल व्यवहार करे—जैसे वीणा की तनी हुई ताँतें सातों स्वरों का अनुसरण करती हैं।
भीष्म उवाच