Vyāghra–Gomāyu Saṃvāda (व्याघ्रगोमायु संवाद) — Testing Character Beneath Appearances
अप्रमाणा प्रसूतिर्मे शीलत: क्रियते कुलम् । प्रार्थयामि च तत्कर्म येन विस्तीर्यते यश:
“बंधुओ! हमारे कुल की उत्पत्ति को लोग प्रमाणित नहीं मानते; कुल की प्रतिष्ठा तो शील और सदाचार से ही बनती है। इसलिए मैं वही कर्म चाहता हूँ, जिससे हमारे वंश का यश विस्तृत हो।”
भीष्म उवाच