Durgātitaraṇa—Conduct for Crossing Difficulties (दुर्गातितरणम्)
भीष्म उवाच आश्रमेषु यथोक्तेषु यथोक्तं ये द्विजातय: । वर्तन्ते संयतात्मानो दुर्गाण्यतितरन्ति ते
भीष्म बोले—राजन्! जो द्विज शास्त्रोक्त चारों आश्रमों में मन को वश में रखकर, विधि के अनुसार यथावत आचरण करते हैं, वे दुःखों के दुर्गम पार को पा लेते हैं।
भीष्म उवाच