Satya–Anṛta Viveka (Discrimination between Truth and Falsehood) | सत्य–अनृत विवेकः
भवेत् सत्यं न वक्तव्यं वक्तव्यमनृतं भवेत् । यत्रानृतं भवेत् सत्यं सत्यं वाप्यनृतं भवेत्
जहाँ असत्य ही सत्य का कार्य कर दे (किसी प्राणी को संकट से बचा दे) अथवा सत्य ही असत्य बन जाए (किसी के प्राणों को संकट में डाल दे), ऐसे अवसर पर सत्य नहीं बोलना चाहिए; वहाँ असत्य कहना ही उचित है।
भीष्म उवाच