मातापितृगुरुपूजा-प्रशंसा
Praise of Venerating Mother, Father, and Teacher
येन प्रीणाति पितरं तेन प्रीत: प्रजापति: । प्रीणाति मातरं येन पृथिवी तेन पूजिता
जिस कर्म से मनुष्य पिता को प्रसन्न करता है, उसी से प्रजापति (ब्रह्मा) प्रसन्न होते हैं; और जिस व्यवहार से वह माता को प्रसन्न करता है, उसी से समूची पृथ्वी की भी पूजा हो जाती है।
भीष्म उवाच