शूरलक्षणवर्णनम् | Marks and Typologies of Martial Temperament
भीष्म उवाच यथा55चरितमेवात्र शस्त्र पत्रं विधीयते । आचारादू वीरपुरुषस्तथा कर्मसु वर्तते
भीष्म बोले— राजन्! यहाँ अस्त्र-शस्त्र और सन्नाह आदि उसी प्रकार नियत होते हैं जैसे देश और कुल की परम्परागत मर्यादा है। वीर पुरुष अपने आचार के अनुसार ही समस्त कर्मों में प्रवृत्त होता है।
भीष्म उवाच