उपायधर्म-सेनायोगः
Upāya-dharma and Senāyoga: Expedient Ethics & Army Deployment
जयं जानीत धर्मस्य मूलं सर्वसुखस्य च । या भीरूणां परा ग्लानि: शूरस्तामधिगच्छति
हे वीरो! युद्ध में विजय को ही धर्म और समस्त सुखों का मूल समझो। जिस प्रहार और मृत्यु से कायरों को घोर ग्लानि होती है, उसी को शूर पुरुष हर्षपूर्वक स्वीकार करता है।
भीष्म उवाच