उपायधर्म-सेनायोगः
Upāya-dharma and Senāyoga: Expedient Ethics & Army Deployment
पदातिनागबहुला प्रावृट्काले प्रशस्यते । गुणानेतान् प्रसंख्याय देशकालौ प्रयोजयेत्
भीष्म ने कहा—वर्षाकाल में वही सेना प्रशंसित होती है जिसमें पैदल और गजसवार अधिक हों। इन गुणों का भलीभाँति विचार करके देश और काल को दृष्टि में रखकर सेना का प्रयोग करना चाहिए।
भीष्म उवाच