भীমेन युधिष्ठिरस्य त्यागवृत्तेः प्रतिषेधः
Bhīma’s Rebuttal of Yudhiṣṭhira’s Renunciatory Inclination
नेमे मृगा: स्वर्गजितो न वराहा न पक्षिण: । अथान्येन प्रकारेण पुण्यमाहुर्न तं जना:
भीम बोले—वन में सदा रहने पर भी न ये मृग स्वर्ग को जीत सके हैं, न वराह, न पक्षी। पुण्य की प्राप्ति तो अन्य प्रकार से बतायी गयी है; श्रेष्ठ जन केवल वनवास को ही पुण्यकारक नहीं मानते।
भीम उवाच