आचार्य शीघ्रं कलशं जलपूर्ण समानय । द्रोणपुत्रका यह मनको प्रसन्न करनेवाला वचन सुनकर कुरुराज दुर्योधनने कृपाचार्यसे कहा--'आचार्य! आप शीघ्र ही जलसे भरा हुआ कलश ले आइये'
Sañjaya uvāca — Ācārya, śīghraṃ kalaśaṃ jalapūrṇaṃ samānaya.
संजय बोले—“आचार्य! शीघ्र ही जल से भरा कलश ले आइए।” द्रोणपुत्र के मन को स्थिर करने वाले वचन सुनकर कुरुराज दुर्योधन ने कृपाचार्य से ऐसा कहा।
संजय उवाच