Duryodhana’s Post-Duel Lament and Instructions (भग्नसक्थस्य विलापः)
पूर्व चाभिगतं तत्र सो5पश्यदृषिसत्तमम् | पादौ प्रपीड्य कृष्णस्य राज्ञश्नापि जनार्दन:
pūrvaṃ cābhigataṃ tatra so 'paśyad ṛṣisattamam | pādau prapīḍya kṛṣṇasya rājñaś cāpi janārdanaḥ ||
वहाँ उन्होंने उस परम श्रेष्ठ ऋषि को देखा, जिनसे वे पहले भी मिल चुके थे। तब जनार्दन श्रीकृष्ण ने धर्मानुसार आदर प्रकट करते हुए उस राजपुरुष के चरण दबाए और प्रणाम किया।
वैशम्पायन उवाच