Duryodhana’s Post-Duel Lament and Instructions (भग्नसक्थस्य विलापः)
वीक्षितुं पुरुष: शक्तस्त्वामृते पुरुषोत्तम । “वीर! अब उन्हें प्रसन्न करनेका कार्य ही मुझे समयोचित जान पड़ता है। पुरुषोत्तम! आपके सिवा दूसरा कौन ऐसा पुरुष है, जो पुत्रोंके शोकसे दुर्बल हो क्रोधसे लाल आँखें करके बैठी हुई गान्धारी देवीकी ओर आँख उठाकर देख सके
“वीर! अब उन्हें प्रसन्न करने का कार्य ही मुझे समयोचित जान पड़ता है। पुरुषोत्तम! आपके सिवा दूसरा कौन ऐसा पुरुष है, जो पुत्र-शोक से दुर्बल होकर, क्रोध से लाल नेत्र किए बैठी हुई देवी गान्धारी की ओर आँख उठाकर देख सके?”
वैशम्पायन उवाच