Duryodhana-śibira-praveśaḥ — The Pāṇḍavas Enter the Kaurava Camp; The Burning of Arjuna’s Chariot
न च वो हृदि कर्तव्यं यदयं घातितो रिपु: । मिथ्यावध्यास्तथोपायैर्बहव: शत्रवोदधिका:,“इस प्रकार जो यह शत्रु मारा गया है इसके लिये तुम्हें अपने मनमें विचार नहीं करना चाहिये? बहुतेरे अधिक शक्तिशाली शत्रु नाना प्रकारके उपायों और कूटनीतिके प्रयोगोंद्वारा मारनेके योग्य होते हैं
और यह शत्रु मारा गया है—इस बात को तुम अपने हृदय में बोझ न बनाओ। इससे भी अधिक बलवान बहुत-से शत्रु नाना उपायों और नीति-कौशल से वध के योग्य होते हैं।
संजय उवाच