Duryodhana-vadha-pratikriyā: Harṣa, Nindā, and Kṛṣṇa’s Nīti-vyākhyā (Śalya-parva 60)
तस्माद्धत्वाकृतप्रज्ञं लुब्धं कामवशानुगम् । लभतां पाण्डव: काम॑ धर्मेडधर्मे च वा कृते,इसलिये मैंने विचार किया कि कामके वशीभूत हुए लोभी और अजितात्मा दुर्योधनको मारकर धर्म या अधर्म करके पाण्डुपुत्र भीम अपनी इच्छा पूरी कर लें
tasmād dhatvākṛtaprajñaṃ lubdhaṃ kāmavaśānugam | labhatāṃ pāṇḍavaḥ kāmaṃ dharme 'dharme ca vā kṛte ||
इसलिए मैंने सोचा—जिसकी बुद्धि भ्रष्ट है, जो लोभी है और काम के वश में चलता है, उस दुर्योधन को मारकर पाण्डव भीम अपनी अभिलाषा पूरी कर ले; चाहे वह कर्म धर्म माना जाए या अधर्म।
युधिछिर उवाच