Duryodhana-vadha-pratikriyā: Harṣa, Nindā, and Kṛṣṇa’s Nīti-vyākhyā (Śalya-parva 60)
श्रीकृष्णने कहा--भैया! आप संसारमें क्रोधरहित, धर्मात्मा और निरन्तर धर्मपर अनुग्रह रखनेवाले सत्पुरुषके रूपमें विख्यात हैं; अत: शान्त हो जाइये, क्रोध न कीजिये ।। प्राप्त कलियुगं विद्धि प्रतिज्ञां पाण्डवस्य च । आनुृण्यं यातु वैरस्य प्रतिज्ञायाश्व॒ पाण्डव:,समझ लीजिये कि कलियुग आ गया। पाण्डुपुत्र भीमसेनकी प्रतिज्ञापर भी ध्यान दीजिये। आज पाण्डुकुमार भीम वैर और प्रतिज्ञाके ऋणसे मुक्त हो जायँ
śrīkṛṣṇa uvāca—bhrātaḥ! tvaṃ loke krodharahitaḥ dharmātmā ca satataṃ dharme ’nugrahavān satpuruṣa-rūpeṇa vikhyātaḥ; tasmāc chānto bhava, mā krodhaṃ kṛthāḥ. prāptaṃ kali-yugaṃ viddhi, pratijñāṃ pāṇḍavasya ca; ānṛṇyaṃ yātu vairasya pratijñāyāś ca pāṇḍavaḥ.
श्रीकृष्ण बोले—भैया! आप संसार में क्रोधरहित, धर्मात्मा और सदा धर्म के पक्षधर सत्पुरुष के रूप में प्रसिद्ध हैं; इसलिए शांत हो जाइए, क्रोध न कीजिए। यह जानिए कि कलियुग-सा समय आ पहुँचा है; और पाण्डव की प्रतिज्ञा को भी स्मरण रखिए। आज पाण्डव वैर के ऋण और अपनी प्रतिज्ञा के भार से मुक्त हो जाए।
श्रीकृष्ण उवाच