Duryodhana-vadha-pratikriyā: Harṣa, Nindā, and Kṛṣṇa’s Nīti-vyākhyā (Śalya-parva 60)
तस्योर्ध्वबाहो: सदृशं रूपमासीन्महात्मन: । बहुधातुविचित्रस्य श्वेतस्येव महागिरे:,ऐसा कहकर महाबली बलराम अपना हल उठाकर भीमसेनकी ओर दौड़े। उस समय अपनी भुजाएँ ऊपर उठाये हुए महात्मा बलरामजीका रूप अनेक धातुओंके कारण विचित्र शोभा पानेवाले महान् श्वेतपर्वतके समान जान पड़ता था
tasyordhvabāhoḥ sadṛśaṃ rūpam āsīn mahātmanaḥ | bahudhātuvicitrasyā śvetasyeva mahāgireḥ ||
भुजाएँ ऊपर उठाए हुए उस महात्मा का रूप अनेक धातुओं से विचित्र शोभा पाने वाले महान् श्वेत पर्वत के समान था। उस उग्र क्षण में यह दृश्य बलराम की अपार शक्ति और उससे उपजने वाले विस्मय को प्रकट करता था, जो मर्यादा को तोड़ देने को उद्यत थी।
संजय उवाच