Vṛddha-kanyā-carita and Balarāma’s Kurukṣetra Inquiry (वृद्धकन्या-चरितम् / कुरुक्षेत्रफल-प्रश्नः)
तस्मात् सारस्वत: पुत्रो महांस्ते वरवर्णिनि । तवैव नाम्ना प्रथित:ः पुत्रस्ते लोकभावन:,“महाभागे! तुम पूर्वकालमें ब्रह्माजीके सरोवरसे प्रकट हुई हो। सरिताओंमें श्रेष्ठ सरस्वती! कठोर व्रतका पालन करनेवाले मुनि तुम्हारी महिमाको जानते हैं। प्रियदर्शने! तुम सदा मेरा भी प्रिय करती रही हो; अतः वरवर्णिनि! तुम्हारा यह लोकभावन महान पुत्र तुम्हारे ही नामपर “सारस्वत” कहलायेगा
tasmāt sārasvataḥ putro mahāṁs te varavarṇini | tavaiva nāmnā prathitaḥ putras te lokabhāvanaḥ |
इसलिए, वरवर्णिनी! तुम्हारा यह महान पुत्र तुम्हारे ही नाम से प्रसिद्ध होकर ‘सारस्वत’ कहलाएगा। वह लोकों का उपकार करने वाला होगा।
वैशम्पायन उवाच