Asita Devala Observes Jaigīṣavya’s Yogic Attainment and Chooses Mokṣa-dharma (देवल-जैगीषव्योपाख्यानम्)
यत्र रामो महाभागो भार्गव: सुमहातपा:,जहाँ महातपस्वी भृगुवंशी महाभाग परशुरामजीने बारंबार क्षत्रियनरेशोंका संहार करके इस पृथ्वीको जीतनेके पश्चात् मुनिश्रेष्ठ कश्यपको आचार्यरूपसे आगे रखकर वाजपेय तथा एक सौ अभश्वमेध-यज्ञद्वारा भगवानका पूजन किया और दक्षिणारूपमें समुद्रोंसहित यह सारी पृथ्वी दे दी
yatra rāmo mahābhāgo bhārgavaḥ sumahātapāḥ, kṣatriyanṛpasaṃhāraṃ kṛtvā punaḥ punaḥ pṛthivīm imāṃ jitvā, munīśreṣṭhaṃ kaśyapam ācāryarūpeṇa puraskṛtya vājapeyena ca śataṃ cāśvamedhaiś ca bhagavantaṃ samapūjayat, dakṣiṇārūpeṇa ca samudrasahitāṃ sarvām imāṃ pṛthivīṃ dadau.
वैशम्पायन बोले—जहाँ भृगुवंशी महाभाग, महातपस्वी राम (परशुराम) ने बार-बार क्षत्रिय नरेशों का संहार करके इस पृथ्वी को जीत लिया; फिर मुनिश्रेष्ठ कश्यप को आचार्य रूप में आगे रखकर वाजपेय तथा सौ अश्वमेध यज्ञों द्वारा भगवान का पूजन किया और दक्षिणा में समुद्रों सहित यह सारी पृथ्वी दान कर दी।
वैशम्पायन उवाच