Varuṇābhiṣeka–Agni-anveṣaṇa–Kaubera-tīrtha
Varuṇa’s Consecration; Search for Agni; Kaubera Sacred Site
वैष्णव्यश्व तथा सौर्यों वाराह्म॒श्न महाबला: | रूपेणाप्सरसां तुल्या मनोहायों मनोरमा:,वे वर देनेमें समर्थ, अपनी इच्छाके अनुसार चलनेवाली और सदा आनन्दमें निमग्न रहनेवाली हैं। शत्रुओंको संताप देनेवाले भरतश्रेष्ठ) उन मातृकाओंमेंसे कुछ यमकी शक्तियाँ हैं, कुछ रुद्रकी। कुछ सोमकी शक्तियाँ हैं और कुछ कुबेरकी। वे सब-की-सब महान् बलसे सम्पन्न हैं। इसी तरह कुछ वरुणकी, कुछ देवराज इन्द्रकी, कुछ अग्नि, वायु, कुमार, ब्रह्मा, विष्णु, सूर्य तथा भगवान् वराहकी महाबलशालिनी शक्तियाँ हैं, जो रूपमें अप्सराओंके समान मनोहारिणी और मनोरमा हैं
vaiṣṇavyaś ca tathā sauryāḥ vārāhāś ca mahābalāḥ | rūpeṇāpsarasāṃ tulyā manohāryo manoramāḥ ||
वैशम्पायन बोले—उन महाबलशालिनी मातृकाओं में विष्णु, सूर्य तथा भगवान् वराह की शक्तियाँ भी थीं। वे सब महान् बल से सम्पन्न थीं; रूप में अप्सराओं के समान मनोहर और अत्यन्त रमणीय थीं।
वैशम्पायन उवाच