Kārttikeya-Abhiṣecana: Mātṛgaṇa-Nāma Saṃkīrtana and Skanda’s Commission
पृथुदंष्टा महादंष्टा: स्थूलौष्ठा हरिमूर्थजा: । नानापादौष्टदंष्टाश्न नानाहस्तशिरोधरा:,किन्हींकी दाढ़ें बड़ी और किन्हींकी मोटी थीं। किन्हींके ओठ मोटे और सिरके बाल नीले थे। किन्हींके पैर, ओठ, दाढ़ें, हाथ और गर्दनें नाना प्रकारकी और अनेक थीं
pṛthudaṃṣṭrā mahādaṃṣṭrāḥ sthūlauṣṭhā harimūrdhajāḥ | nānāpādauṣṭhadaṃṣṭrāś ca nānāhastāśirodharāḥ ||
वैशम्पायन बोले— किसी के दाँत चौड़े थे, किसी के अत्यन्त बड़े; किसी के ओठ मोटे थे और सिर के बाल हरित-नील से प्रतीत होते थे। उनके पैर, ओठ, दाँत, हाथ और गर्दनें अनेक प्रकार की और विविध रूपों वाली थीं।
वैशम्पायन उवाच