Sarasvatī-Śāpavimokṣa, Rākṣasa-Mokṣa, and Aruṇā-Tīrtha
Indra–Namuci Expiation
सा तस्य वचन श्र॒ुत्वा ज्ञात्वा पापं चिकीर्षितम् वसिष्ठस्य प्रभावं च जानन्त्यप्रतिमं भुवि
sā tasya vacanaṃ śrutvā jñātvā pāpaṃ cikīrṣitam | vasiṣṭhasya prabhāvaṃ ca jānanty apratimaṃ bhuvi ||
उसके वचन सुनकर उसने समझ लिया कि वह पापपूर्ण कर्म करने का निश्चय कर चुका है; और पृथ्वी पर वसिष्ठ के अनुपम प्रभाव को जानकर वह उसी के अनुरूप (विचार करने लगी)।
वैशम्पायन उवाच