सरस्वतीतीर्थानुक्रमः — बलरामस्य तीर्थयात्रा
Sarasvatī Tīrtha Itinerary — Balarāma’s Pilgrimage
तब देवपुरोहित बृहस्पतिजीने वेदमन्त्रोंक उस तुमुलनादको सुनकर देवताओंसे कहा --'देवगण! त्रित मुनिका यज्ञ हो रहा है, वहाँ हमलोगोंको चलना चाहिये ।। स हि क्रुद्ध: सृजेदन्यान् देवानपि महातपा: । “वे महान् तपस्वी हैं। यदि हम नहीं चलेंगे तो वे कुपित होकर दूसरे देवताओंकी सृष्टि कर लेंगे” ।। तच्छुत्वा वचनं तस्य सहिता: सर्वदेवता:
vaiśampāyana uvāca | tataḥ devapurohito bṛhaspatiḥ vedamantraiḥ uktaṃ taṃ tumulanādaṃ śrutvā devatān uvāca— “devagaṇāḥ! tritasya muneḥ yajño vartate; tatra asmābhiḥ gantavyam. sa hi kruddhaḥ sṛjed anyān devān api, mahātapāḥ. tac chrutvā vacanaṃ tasya sahitāḥ sarvadevatāḥ …”
वैशम्पायन बोले—तब देवपुरोहित बृहस्पति ने वेदमन्त्रों से गूँजते उस तुमुलनाद को सुनकर देवताओं से कहा—“देवगण! त्रित मुनि का यज्ञ चल रहा है; हमें वहाँ जाना चाहिए। वे महान् तपस्वी हैं; यदि हम न गए तो वे क्रुद्ध होकर दूसरे देवताओं की भी सृष्टि कर सकते हैं।” उनका यह वचन सुनकर सब देवता एकमत होकर वैसा ही करने को उद्यत हुए।
वैशम्पायन उवाच