Trita in the Well (Udapāna-kathā) — Balarāma’s Tīrtha Observances
क्षयाच्चैवास्य देवेश प्रजाश्नैव गता: क्षयम् वीरुदोषधयश्नैव बीजानि विविधानि च,“चन्द्रमा क्षीण हो चुके हैं और उनका कुछ ही अंश शेष दिखायी देता है। देवेश्वर! उनके क्षयसे लता, वीरुतू, ओषधियाँ भाँति-भाँतिके बीज और सम्पूर्ण प्रजा भी क्षीण हो गयी है
kṣayāccaivāsya deveśa prajāś caiva gatāḥ kṣayam | vīrud-oṣadhayaś caiva bījāni vividhāni ca ||
वैशम्पायन बोले— “देवेश्वर! इनके क्षय के साथ प्रजा भी क्षय को प्राप्त होती है। लताएँ, वीरुत, औषधियाँ और नाना प्रकार के बीज भी वैसे ही नष्ट-प्राय हो जाते हैं।”
वैशम्पायन उवाच