Trita in the Well (Udapāna-kathā) — Balarāma’s Tīrtha Observances
न च तत् कृतवान् राजा यथा ख्यातं हि तत् पुरा,नरेश्वर! किंतु राजा धृतराष्ट्रने भगवानका कहना नहीं माना। यह सब बात पहले यथार्थरूपसे बतायी गयी है। महाबाहु पुरुषोत्तम भगवान् श्रीकृष्ण वहाँ संधि करानेमें सफलता न मिलनेपर पुनः उपप्लव्यमें ही लौट आये
na ca tat kṛtavān rājā yathā khyātaṃ hi tat purā | nareśvara kintu rājā dhṛtarāṣṭreṇa bhagavatā na mānitaḥ | etad sarvaṃ pūrvaṃ yathārtharūpeṇa kathitaṃ | mahābāhuḥ puruṣottamo bhagavān śrīkṛṣṇaḥ tatra sandhiṃ kārayituṃ aśaktaḥ san punar upaplavyaṃ eva pratyāgacchat |
वैशम्पायन बोले—नरेश्वर! राजा ने वैसा आचरण नहीं किया जैसा पहले उचित और सत्य कहा गया था; धृतराष्ट्र ने भगवान् के वचन को स्वीकार नहीं किया। यह सब पहले यथार्थ रूप से कहा जा चुका है। वहाँ सन्धि न हो सकने पर महाबाहु पुरुषोत्तम श्रीकृष्ण फिर उपप्लव्य लौट आए।
वैशम्पायन उवाच