गदायुद्धप्रतिज्ञा — The Vow and Terms of the Mace Duel
कथं पारमगत्वा हि युद्धे त्वं वै जिजीविषु: । इमान् निपतितान दृष्ट्वा पुत्रान् भ्रातृन् पितूंस्तथा,'युद्धसे पार पाये बिना ही तुम्हें जीवित रहनेकी इच्छा कैसे हो गयी? तात! रणभूमिमें गिरे हुए इन पुत्रों, भाइयों और चाचे-ताउओंको देखकर सम्बन्धियों, मित्रों, मामाओं और बन्धु-बान्धवोंका वध कराकर इस समय तालाबमें क्यों छिपे बैठे हो?
sañjaya uvāca | kathaṁ pāram agatvā hi yuddhe tvaṁ vai jijīviṣuḥ | imān nipatitān dṛṣṭvā putrān bhrātṝn pitṝṁs tathā |
संजय बोले—युद्ध का पार पाए बिना, उसे अंत तक पहुँचाए बिना, तुम्हें जीवित रहने की इच्छा कैसे हो गई? रणभूमि में गिरे हुए इन पुत्रों, भाइयों और पितृतुल्य वृद्धों को देखकर भी तुम प्राण-रक्षा में कैसे लगे हो?
संजय उवाच