Dvaipāyana-hrade Duryodhanasya Māyā — Yudhiṣṭhirasya Dharmoktiḥ (Śalya-parva, Adhyāya 30)
सिंहनादांस्ततकश्षक्रुः क्ष्वेडाश्न भरतर्षभ । त्वरिता: क्षत्रिया राजन् जम्मुर्देपायनं हृदम्,भरतभूषण नरेश! वे सभी क्षत्रिय सिंहनाद एवं गर्जना करने लगे तथा तुरंत ही द्वैपायन नामक सरोवरके पास जा पहुँचे
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संजय बोले—भरतश्रेष्ठ नरेश! वे सब क्षत्रिय सिंहनाद और गर्जना करने लगे तथा शीघ्र ही द्वैपायन नामक सरोवर के पास जा पहुँचे।
संजय उवाच