धृतराष्ट्र-संजय-संवादः — दुर्योधनस्य ह्रदप्रवेशः
Dhṛtarāṣṭra–Saṃjaya Dialogue: Duryodhana’s Entry into the Lake
अद्य ते निहनिष्यामि क्षरेणोन्मथितं शिर: । वृक्षात् फलमिवाविद्धं लगुडेन प्रमाथिना,“जिन दुरात्माओंने पूर्वकालमें हमलोगोंकी हँसी उड़ायी थी, वे सब मारे गये। अब केवल कुलांगार दुर्योधन और उसका मामा तू--ये दो ही बच गये हैं। जैसे मथ डालनेवाले डंडेसे मारकर पेड़से फल तोड़ लिया जाता है, उसी प्रकार आज मैं क्षुरके द्वारा तेरा मस्तक काटकर तुझे मौतके हवाले कर दूँगा”
adya te nihaniṣyāmi kṣureṇonmathitaṃ śiraḥ | vṛkṣāt phalam ivāviddhaṃ laguḍena pramāthinā ||
संजय बोले— “आज मैं तुझे मार गिराऊँगा; उस्तरे-सी धार वाले शस्त्र से तेरा सिर काट दूँगा—जैसे प्रचण्ड गदा से वृक्ष से फल गिरा दिया जाता है।”
संजय उवाच