Adhyāya 21 — Duryodhanasya bāṇavarṣaḥ
Duryodhana’s Arrow-Storm and the Dust-Obscured Engagements
त॑ परे नाभ्यवर्तन्त मर्त्या मृत्युमिवाहवे । अथान्यं रथमास्थाय हार्दिक्य: समपद्यत,जैसे मरणधर्मा मनुष्य अपनी मृत्युका उल्लंघन नहीं कर सकते, उसी प्रकार युद्धभूमिमें शत्रुसैनिक राजा दुर्योधनका सामना न कर सके। इतनेहीमें कृतवर्मा दूसरे रथपर आरूढ़ होकर वहाँ आ पहुँचा
जैसे मरणधर्मा मनुष्य अपनी मृत्यु का उल्लंघन नहीं कर सकते, वैसे ही रणभूमि में शत्रु-सैनिक राजा दुर्योधन का सामना न कर सके। इतने ही में हार्दिक्य कृतवर्मा दूसरे रथ पर आरूढ़ होकर वहाँ आ पहुँचा।
संजय उवाच