Śalya-hatānantarāṇi: Madrarāja-padānugānāṃ praskandana and the Pandava counter-encirclement (शल्यहतानन्तराणि—मद्रराजपदानुगानां प्रस्कन्दनम्)
ततस्तु तूर्ण समरे महारथौ परस्परस्यान्तरमीक्षमाणौ । शरैर्भुशं विव्यधतुर्नुपोत्तमौ महाबलौ शत्रुभिरप्रधृष्यौ,वे दोनों महारथी समरभूमिमें एक-दूसरेपर प्रहार करनेका अवसर देख रहे थे। दोनों ही शत्रुओंके लिये अजेय, महाबलवान् तथा राजाओंमें श्रेष्ठ थे। अतः: बड़ी उतावलीके साथ बाणोंद्वारा एक-दूसरेको गहरी चोट पहुँचाने लगे
tatastu tūrṇaṃ samare mahārathau parasparasyāntaram īkṣamāṇau | śarair bhuśaṃ vivyadhatur nṛpottamau mahābalau śatrubhir apradhṛṣyau ||
संजय बोले—फिर समर में वे दोनों महारथी एक-दूसरे की कमजोरी का अवसर देखते हुए शीघ्रता से बाणों द्वारा परस्पर को बार-बार गहरे घायल करने लगे। वे दोनों महाबली, राजाओं में श्रेष्ठ और शत्रुओं के लिए अजेय थे।
संजय उवाच