Śalya–Yudhiṣṭhira Duel and the Discharge of the Śakti (शल्यवधप्रसङ्गः)
यां यां प्रत्युद्ययौ सेनां तां तां ज्येष्ठ: स पाण्डव: । शरैरपातयद् राजन गिरीन् वजेैौरिवोत्तमै:
राजन्! जिस-जिस सेना की ओर ज्येष्ठ पाण्डव अग्रसर हुए, उसी-उसी को अपने बाणों से गिरा दिया—जैसे इन्द्र उत्तम वज्रों के प्रहार से पर्वतों को धराशायी कर देता है।
संजय उवाच