शल्यपरिघातः (Śalya Under Encirclement) — Mahābhārata, Śalya-parva, Adhyāya 12
क्षीणवद् विद्धलत्वात् तु निमेषात् पुनरुत्थित:
kṣīṇavad viddhalatvāt tu nimeṣāt punarutthitaḥ
क्षीण-सा और छिन्न-भिन्न देह वाला प्रतीत होते हुए भी वह निमेषमात्र में फिर उठ खड़ा हुआ॥
संजय उवाच