Śalya–Bhīma Gadā-saṃnipāta and Śalya’s Bāṇa-jāla against Yudhiṣṭhira
Book 9, Chapter 11
शस्त्राग्रेष्वभवज्ज्वाला नेत्राण्याहत्य वर्षती | शिर:स्वलीयन्त भृशं काकोलूकाश्व केतुषु
शस्त्रों के अग्रभागों पर ज्वाला-सी प्रकट होती, नेत्रों को चकाचौंध कर, मानो बरसती हुई पृथ्वी पर गिरती थी। योद्धाओं के मस्तकों और ध्वजाओं पर कौए और उल्लू बार-बार आकर घिरने लगे।
संजय उवाच