शल्यस्य पाण्डवसेनापीडनम् — Śalya’s Assault on the Pāṇḍava Host
with Omens and Bhīma’s Counter
प्रापतत् तच्च सहसा पाण्डवानां महद् बलम् | दधारैको रणे शल्यो वेलोद्वृत्तमिवार्णवम्
उसी समय पाण्डवों की वह विशाल सेना भी सहसा वहाँ आ पहुँची; पर जैसे तट उमड़ते समुद्र को रोक देता है, वैसे ही अकेले शल्य ने रणभूमि में उस सेना की गति रोक दी।
संजय उवाच