Rudra’s Omitted Share in the Yajña (रुद्रभागानुपपत्तिः — यज्ञोपाख्यानम्)
स तु तेनैव रूपेण दिवं प्राप्पय व्यराजत । अन्वीयमानो रुद्रेण युधिष्ठिर नभस्तले
वह उसी रूप में आकाश को प्राप्त होकर प्रकाशित होने लगा; और हे युधिष्ठिर, नभस्तल में रुद्रदेव उसके पीछे-पीछे लगे रहे।
वैशम्पायन उवाच