Yudhiṣṭhira’s Lament and Kṛṣṇa’s Rudra-Cosmogony Explanation (सौप्तिक पर्व, अध्याय १७)
श्रीभगवानुवाच नूनं स देवदेवानामीश्ररेश्वरमव्ययम् । जगाम शरण द्रौणिरेकस्तेनावधीद् बहूनू
श्रीभगवान् बोले— राजन्! निश्चय ही द्रौणि अश्वत्थामा ने देवों के भी ईश्वर, देवाधिदेव, अविनाशी भगवान् शिव की शरण ली थी; इसी कारण उसने अकेले ही बहुत-से वीरों का संहार कर डाला।
वैशम्पायन उवाच