अध्याय १ — न्यग्रोधवनोपवेशनम् तथा द्रौणिनिश्चयः
Night at the Banyan and Drauṇi’s Resolve
इच्छया ते प्रवल्गन्ति ये सत्त्वा रात्रिचारिण: । दिवाचराश्ष ये सत्त्वास्ते निद्रावशमागता:
icchayā te pravalaganti ye sattvā rātricāriṇaḥ | divācarāś ca ye sattvās te nidrāvaśam āgatāḥ ||
संजय बोले—जो प्राणी रात्रि में विचरते हैं, वे अपनी इच्छा के अनुसार उछल-कूद करने लगे; और जो दिन में विचरने वाले जीव थे, वे निद्रा के वश में आ गये।
संजय उवाच