Dhṛtarāṣṭra–Saṃjaya Saṃvāda: Anuśocana, Nimittāni, and Vidura’s Warning
अपने छोटे भाइयोंके साथ खड़े हुए भीमसेन उपर्युक्त बात कहकर शत्रुओंकी ओर बार-बार देखने लगे; मानो सिंह मृगोंके समूहमें खड़ा हो उन््हींकी ओर देख रहा हो ।। सान्त्व्यमानो वीक्षमाण: पार्थेनाक्लिष्टकर्मणा । खिद्यत्येव महाबाहुरन्तर्दाहिन वीर्यवान्,अनायास ही महान् पराक्रम कर दिखानेवाले अर्जुन शत्रुओंकी ओर देखनेवाले भीमसेनको बार-बार शान्त कर रहे थे, परंतु पराक्रमी महाबाहु भीमसेन अपने भीतर धधकती हुई क्रोधाग्निसे जल रहे थे
sāntvyamāno vīkṣamāṇaḥ pārthenākliṣṭa-karmaṇā | khidyaty eva mahābāhur antardāhī vīryavān ||
यह कहकर भीमसेन अपने छोटे भाइयों के साथ खड़े होकर शत्रुओं की ओर बार-बार देखने लगे—मानो मृगों के बीच सिंह खड़ा हो। अक्लिष्टकर्मा अर्जुन बार-बार उन्हें शान्त करते रहे, परन्तु पराक्रमी महाबाहु भीम भीतर ही भीतर क्रोध की ज्वाला से जलते रहे।
भीम उवाच