Śakrasya Divyā Sabhā
Indra’s Radiant Assembly Hall
अयोनिजा योनिजाश्व वायुभक्षा हुताशिन: । ईशानं सर्वलोकस्य वज्िणं समुपासते,पराशर, पर्वत, सावर्णि, गालव, शंख, लिखित, गौरशिरा मुनि, दुर्वासा, क्रोधन, श्येन, दीर्घतमा मुनि, पवित्रपाणि, सावर्णि (द्वितीय), याज्ञवल्क्य, भालुकि, उद्दालक, श्वेतकेतु, ताण्ड्य, भाण्डायनि, हविष्मान्, गरिष्ठ, राजा हरिश्वन्द्र, हृद्य, उदरशाण्डिल्य, पराशरनन्दन व्यास, कृषीवल, वातस्कन्ध, विशाख, विधाता, काल, करालदन्त, त्वष्टा, विश्वकर्मा तथा तुम्बुरु--ये और दूसरे अयोनिज या योनिज मुनि एवं वायु पीकर रहनेवाले तथा हविष्य- पदार्थोंको खानेवाले महर्षि सम्पूर्ण लोकोंके अधीश्वर वज्रधारी इन्द्रकी उपासना करते हैं
ayonijā yonijāś ca vāyubhakṣā hutāśinaḥ | īśānaṃ sarvalokasya vajriṇaṃ samupāsate |
अयोनिज और योनिज, वायुभक्ष और हविष्याहारी—ये सब सम्पूर्ण लोकों के अधीश्वर वज्रधारी इन्द्र की उपासना करते हैं।
नारद उवाच