नारदेन दिव्यसभाः कथितुं प्रतिज्ञा
Nārada’s Prelude to Describing the Divine Assemblies
वैशम्पायन उवाच तच्छुत्वा नारदस्तस्य धर्मराजस्य भाषितम् | पाण्डवं प्रत्युवाचेदं स्मयन् मधुरया गिरा
वैशम्पायन बोले—जनमेजय! धर्मराज युधिष्ठिर की यह बात सुनकर देवर्षि नारद मुसकराए और पाण्डुपुत्र को मधुर वाणी में उत्तर देने लगे।
वैशम्पायन उवाच