नारदेन दिव्यसभाः कथितुं प्रतिज्ञा
Nārada’s Prelude to Describing the Divine Assemblies
युधिछिर उवाच भगवन् न्याय्यमाहैतं यथावद् धर्मनिश्चयम् । यथाशक्ति यथान्यायं क्रियते5यं विधिर्मया
युधिष्ठिर बोले—भगवन्! आपने राजधर्म का जो यथार्थ निर्णय बताया है, वह सर्वथा न्यायोचित है। मैं आपके इस न्यायानुकूल विधान का यथाशक्ति पालन करता हूँ।
युधिछिर उवाच