अभुक्तं भुक्तवद् वापि सर्वमाकुब्जवामनम् । अभुज्जाना याज्ञसेनी प्रत्यवैक्षद् विशाम्पते,राजन! उस यज्ञमें द्रौपदी प्रतिदिन स्वयं पहले भोजन न करके इस बातकी देखभाल करती थी कि कुबड़े और बौनोंसे लेकर सब मनुष्योंमें किसने खाया है और किसने अभीतक भोजन नहीं किया है
राजन्! उस यज्ञ में द्रौपदी प्रतिदिन स्वयं पहले भोजन न करके, कुबड़े और बौनों से लेकर सब लोगों में कौन खा चुका है और कौन अभी तक नहीं—इसकी देखभाल करती थी।
दुर्योधन उवाच