Dyūta-āhvāna: Śakuni’s Proposal, Vidura’s Warning, and the Summons of Yudhiṣṭhira
Sabhā-parva 51
ऑपनआ कराता बछ। 2 एकपज्चाशत्तमो< ध्याय: युधिष्ठिरको भेंटमें मिली हुई वस्तुओंका दुर्योधनद्वारा वर्णन दुर्योधन उवाच यन्मया पाण्डवेयानां दृष्टं तच्छूणु भारत | आह्तं भूमिपालैर्हि वसु मुख्यं ततस्ततः,दुर्योधन बोला--भारत! मैंने पाण्डवोंके यज्ञमें राजाओंके द्वारा भिन्न-भिन्न देशोंसे लाये हुए जो उत्तम धनरत्न देखे थे, उन्हें बताता हूँ, सुनिये
Duryodhana uvāca | yan mayā pāṇḍaveyānāṁ dṛṣṭaṁ tac chṛṇu bhārata | āhṛtaṁ bhūmipālair hi vasu mukhyaṁ tatas tataḥ ||
दुर्योधन बोला—हे भारत! पाण्डवों के यहाँ मैंने जो कुछ देखा, वह सुनो। अनेक देशों से राजाओं ने उत्तम-उत्तम धन-रत्न लाकर भेंट किए थे।
दुर्योधन उवाच