कच्चिन्न चौरैरलुब्धैर्वा कुमारै: स्त्रीबलेन वा । त्वया वा पीड्यते राष्ट्र कच्चित् तुष्टाः कृषीवला:,चोरों, लोभियों, राजकुमारों या राजकुलकी स्त्रियोंद्वारा अथवा स्वयं तुमसे ही तुम्हारे राष्ट्रको पीड़ा तो नहीं पहुँच रही है? क्या तुम्हारे राज्यके किसान संतुष्ट हैं?
नारद ने पूछा—कहीं चोरों, लोभियों, राजकुमारों, राजकुल की स्त्रियों के प्रभाव से, अथवा स्वयं तुम्हारे कारण, तुम्हारा राष्ट्र पीड़ित तो नहीं होता? और क्या तुम्हारे राज्य के कृषक संतुष्ट हैं?
नारद उवाच