Nāradasya Rājadharma-praśnāḥ
Nārada’s Examination of Royal Ethics
कच्चिद् भयादुपगतं क्षीणं वा रिपुमागतम् । युद्धे वा विजितं पार्थ पुत्रवत् परिरक्षसि,कुन्तीनन्दन! जो भयसे अथवा अपनी धन-सम्पत्तिका नाश होनेसे तुम्हारी शरणमें आया हो या युद्धमें तुमसे परास्त हो गया हो, ऐसे शत्रुका तुम पुत्रके समान पालन करते हो या नहीं?
kaccid bhayādupagataṁ kṣīṇaṁ vā ripum āgatam | yuddhe vā vijitaṁ pārtha putravat parirakṣasi ||
नारद बोले—हे पार्थ! जो शत्रु भय से शरण में आया हो, या नष्ट-क्षीण हो गया हो, अथवा युद्ध में तुमसे पराजित होकर आया हो—क्या तुम उसे पुत्र के समान संरक्षण देते हो?
नारद उवाच