Nāradasya Rājadharma-praśnāḥ
Nārada’s Examination of Royal Ethics
कच्चिन्नोग्रेण दण्डेन भृशमुद्धिजसे प्रजा: । राष्ट्र तवानुशासन्ति मन्त्रिणो भरतर्षभ,भरतश्रेष्ठ कठोर दण्डके द्वारा तुम प्रजाजनोंको अत्यन्त उद्धेगमें तो नहीं डाल देते? मन्त्रीलोग तुम्हारे राज्यका न्यायपूर्वक पालन करते हैं न?
kaccin nogreṇa daṇḍena bhṛśam uddvijase prajāḥ | rāṣṭraṃ tavānuśāsanti mantriṇo bharatarṣabha ||
नारद बोले—भरतश्रेष्ठ, क्या तुम कठोर दण्ड के द्वारा प्रजाजनों को अत्यन्त उद्विग्न तो नहीं कर देते? और क्या तुम्हारे मन्त्री न्याय तथा अनुशासन के अनुसार तुम्हारे राज्य का शासन करते हैं?
नारद उवाच