दुर्योधनस्य बलिवर्णनम् — Duryodhana’s Description of Tribute at the Rājasūya
तेन दैवं परं मनन््ये पौरुषं च निरर्थकम् | धार्तराष्ट्राश्न॒ हीयन्ते पार्था वर्धन्ति नित्यश:
इसी कारण मैं दैव को ही श्रेष्ठ मानता हूँ और पुरुषार्थ को निरर्थक; क्योंकि हम धृतराष्ट्र के पुत्र क्षीण होते जा रहे हैं और कुन्ती के पुत्र प्रतिदिन बढ़ते ही जाते हैं।
दुर्योधन उवाच