Adhyāya 45 — Duryodhana’s Distress, Śakuni’s Counsel, and the Summons for Dyūta
तमुवाचैवमुक्तस्तु धर्मराजो जनार्दनम् तव प्रसादाद् गोविन्द प्राप्त: क्रतुवरो मया,उनके ऐसा कहनेपर धर्मराज युधिष्छिर जनार्दनसे बोले--“गोविन्द! आपकी ही कृपासे मैंने यह श्रेष्ठ यज्ञ सम्पन्न किया है
tam uvācaivam uktas tu dharmarājo janārdanam | tava prasādād govinda prāptaḥ kratuvaro mayā ||
यह सुनकर धर्मराज युधिष्ठिर जनार्दन से बोले— “गोविन्द! आपकी कृपा से ही मैंने इस श्रेष्ठ यज्ञ को प्राप्त कर सम्पन्न किया है।”
वैशम्पायन उवाच