Bhīṣma–Śiśupāla-saṃvādaḥ
Bhishma and Shishupala’s exchange in the assembly
इस प्रकार श्रीमह्या भारत सभापव॑के अन्तर्गत शिशुपालवधपर्वमें युधिष्ठिरको आश्वासन नामक चालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ
हे हंस! तुम्हारी अन्तरात्मा रागादि दोषों से दूषित है; अण्डभक्षण का यह अपवित्र कर्म तुम्हारी धर्मोपदेशमयी वाणी के सर्वथा विरुद्ध है।
वैशम्पायन उवाच