Bhīṣma–Śiśupāla-saṃvādaḥ
Bhishma and Shishupala’s exchange in the assembly
ब्रतोपवासैर्बहुभि: कृतं भवति भीष्म यत् | सर्व तदनपत्यस्य मोघं भवति निश्चयात्,भीष्म! अनेक व्रतों और उपवासोंद्वारा जो पुण्य कार्य किया जाता है, वह सब संतानहीन पुरुषके लिये निश्चय ही व्यर्थ हो जाता है
vratopavāsair bahubhiḥ kṛtaṃ bhavati bhīṣma yat | sarvaṃ tad anapatyasya moghaṃ bhavati niścayāt ||
भीष्म! अनेक व्रतों और उपवासों से जो पुण्य संचित होता है, वह संतानहीन पुरुष के लिए निश्चय ही निष्फल हो जाता है।
शिशुपाल उवाच