अर्हणनिर्णयः
Decision on the Highest Honor at the Assembly
अहो बत महद्धूतं स्वयंभूर्यदिदं स्वयम् । आदास्यति पुन: क्षत्रमेवं बलसमन्वितम्,“अहो! ये स्वयम्भू महाविष्णु ऐसे बलसम्पन्न क्षत्रियसमुदायको पुनः उच्छिन्न करना चाहते हैं!
aho bata mahad dhūtaṁ svayambhūr yad idaṁ svayam | ādāsyati punaḥ kṣatram evaṁ balasamanvitam ||
वैशम्पायन बोले— अहो! यह कितना बड़ा अपशकुन है कि स्वयंभू भगवान् स्वयं ही ऐसे बलसम्पन्न क्षत्रिय-समुदाय का अधिकार फिर से छीन लेने को उद्यत प्रतीत होते हैं।
वैशम्पायन उवाच